सड़क पर बना 30 फीट गहरा गड्ढा, प्रशासन नहीं ले रहा सुध

पहले भी हो चुका है हादसा, लेकिन प्रशासन की अभी तक नही खुल रही नींद......

आहोर/जालोर

रिपोर्ट: (विक्रमसिंह करणोत)

निकटवर्ती मुलेवा और तरवाडा गांव के बीच बना बावरला बांध (महेशपुरा) आज पुरा भरापडा है। बांध के भराव क्षेत्र मे पानी ही पानी नज़र आ रहा है। वही इस बांध के भराव क्षेत्र मे ही होकर मुलेवा से चान्दराई जाने वाली मुख्य सडक गुजरती है। ये सडक इस बांध के भराव क्षेत्र मे ही टुट गयी है। टुट ही नही गयी इस सडक के बीचो बीच करीबन 30 फीट गहरा खड्डा बन गया है। और ये गहरा खड्डा पानी से पुरी तरह भरा पडा है। कोई पैदल राहगीर या वाहन चालक कभी भी इस खड्डे मे गिरकर काल का ग्रास बन सकता है लेकिन प्रशासन की तरफ से आज तक ना तो कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है और ना ही किसी प्रकार से कोई व्यवस्था की गयी है जिससे अनजान लोगो को इसकी जानकारी मिल सके।

वैसे देखा जाये तो बांध का पानी अभी और कुछ दिन ऎसे ही पडा रहने वाला है। लगभग अक्टुबर महिने के अंतिम सप्ताह मे इस बांध के पानी को सिंचाई के लिये छोडा जायेगा। तब तक इस खड्डे को ठीक करना तो सम्भव नही है पर सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम तो प्रशासन द्वारा किये ही जा सकते है।

प्रशासन की ये अनदेखी साफ बताती है कि लोगो की जान को लेकर प्रशासन कितना लापरवाह है। एक जान तो पहले ही जा चुकी हैअभी पिछले 11 अगस्त को इसी जगह पर एक युवक अकाल मृत्यु का शिकार हुआ था। 8 अगस्त से लगातार हुई बारिश से ये सडक टुटकर इस जगह पर ये विकराल खड्डा बन गया जिसकी किसी को भनक तक नही थी। और इसी के चलते तरवाडा गांव निवासी रविन्द्र कुमार पुत्र चम्पालाल सरगरा जो कि अपने साथियो के साथ घर से मुलेवा जा रहा था तब पैर फिसलने से इसी खड्डे मे गिर जाने से उसकी मौत हो गयी थी। लेकिन एक युवक की मौत भी प्रशासन की नींद है कि खुलने का नाम ही नही ले रही।

इनका कहना हैं:

सडक के बीचो बीच करीब 30 फीट गहरा खड्डा बना हुआ है जो पानी से भरा हुआ है. जिन लोगो को पता नही है वो इसे सडक पर पडा पानी ही समझते है. ऎसे मे अगर कोई सडकसे इस पानी को पार करने का जोखिम उठा ले तो बडा हादसा हो सकता है. प्रशासन को यहाँ तुरंत प्रभाव से संकेत बोर्ड लगाना चाहिये. ताकि कोई अप्रिय घटना घटित ना हो. साथ ही प्रशासन को इस सडक मार्ग को तुरंत प्रभाव से ठीक करवाना चाहिये ताकि हम ग्रामवासियो को चान्दराई जाने के लिये लम्बे रास्ते का सहारा नही लेना पडे. दुसरे रास्ते से जाने मे चान्द्राई करीब 20 किलोमीटर पडता है जबकि इस रास्ते से ये दुरी मात्र 9 किलोमीटर ही है।

आदाराम मेघवाल
पुर्व सरपंच,
कैलाशकुमार माली,
स्थानीय निवासी

मै अभी तुरंत ही सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता से बात करके वहाँ पर सांकेतिक बोर्ड लगवाने की व्यवस्था करवाता हु. साथ ही सडक की मरम्मत के लिये भी कार्यवाही करने के लिये बात करता हुं।

प्रकाशचन्द्र अग्रवाल,
उपखण्ड अधिकारी, आहोर

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